01/06/2025
एक समय की बात है, एक छोटा गाँव था जहाँ हर दिन एक बूढ़ा किसान अपनी गाय की सेवा करता था। उसका नाम "हरिदास" था। वह गाय को अपने बच्चों जैसा प्यार करता था और रोज़ सुबह उसे नहलाता, ताज़ा चारा देता और फिर उसे शिव मंदिर ले जाकर भगवान के सामने खड़ा करता।
एक दिन गाँव में अकाल पड़ा। खेत सूख गए, अनाज खत्म हो गया। लोगों ने अपनी गायें तक बेच दीं, लेकिन हरिदास ने अपनी गाय को कभी भूखा नहीं रखा। जो कुछ भी मिलता, पहले गाय को खिलाता, फिर खुद खाता।
लोग उसका मज़ाक उड़ाने लगे। बोले, "इतनी भूख में भी गाय को भगवान से ऊपर रखता है!" लेकिन हरिदास बोला,
"गाय ही तो भगवान शिव का रूप है। इसकी सेवा ही मेरी पूजा है।"
उस रात भगवान शिव स्वयं एक साधु के रूप में उसके घर आए। बोले,
"बूढ़े! भूख से मर रहे हो, फिर भी इस गाय की सेवा कर रहे हो? क्या मिला?"
हरिदास मुस्कुराया और बोला,
"मुझे संतोष मिला है, प्रभु। और विश्वास है कि मेरी गौसेवा भगवान तक ज़रूर पहुँचेगी।"
तभी साधु ने अपना असली रूप दिखाया — वह स्वयं भगवान शिव थे! उन्होंने कहा,
"हरिदास, तेरी सेवा और श्रद्धा से मैं अत्यंत प्रसन्न हूँ। यह गाय अब कभी भूखी नहीं रहेगी, और तेरे गाँव में फिर कभी अकाल नहीं पड़ेगा।"
अगली सुबह से गाँव में बारिश हुई, खेत हरे हुए और हर घर में भोजन की खुशबू फैल गई।
सीख:
सच्ची सेवा, भक्ति से बड़ी होती है। जो दिल से दूसरों की सेवा करता है, भगवान उसे कभी अकेला नहीं छोड़ते।