16/03/2024
ये हैं उस्ताद डॉक्टर उस्ताद मुज़्तबा हुसैन,भारत के महान बांसुरीवादक और, मेरे बचपन के दोस्त,ये दुनिया इन जैसे लोगों की वजह से खूबसूरत लगती है, मां सरस्वती कीअपार कृपा है इनपर और इनके परिवार पर। ये पटियाला के पंजाबी यूनिवर्सिटी में संगीत के प्रोफसर हैं ,इनकी धर्मपत्नी सपना हुसैन एक अच्छी नृत्यांगना हैं वंही बेटी "चाहत हुसैन "अच्छी गायिका हैं ,
ये शायद भारत में प्रतिष्ठित एकमात्र मुस्लिम बासुरी वादक हैं , इनके दादा, रहीम बख्श खान, एक प्रसिद्ध शहनाई वादक थे, उन्होंने संगीत की शिक्षा कोलकाता के प्रसिद्ध उस्ताद फरजंद अली से प्राप्त की थी। लेकिन वह एक शौक था, वह एक अमीर जमींदार थे , जिनका पत्थरों का कारोबार फल-फूल रहा था। मुजतबा के पिता उस्ताद पीर बख्श और चाचा फहीमुल्ला खान, दोनों ने उस्ताद फरजंद अली से प्रशिक्षण लिया था, उन्होंने क्रमशः शहनाई और बांसुरी बजाना शुरू किया।
बाद में दोनों आकाशवाणी के पटना केन्द्र से जुड़ गये। युवा मुजतबा ने संगीत की दुनिया में अपना पहला अस्थायी कदम तब उठाया जब उनके उनके पिता, जो शहनाई और बांसुरी दोनों में समान रूप से माहिर थे, ने उन्हें शिक्षा देनी शुरू की और इस तरह यह सफर शुरू हुआ, जो अब मुजतबा को संगीत की दुनिया में नई ऊंचाइयों पर ले गया है।
हम दोनों की दोस्ती ईश्वर की सौगात है। अभी कुछ साल पहले इन्होने मुझे एक मौका दिया "कला ध्यानम" के लिए जंहा इनके बांसुरी वादन पर मुझे लाइव पेंटिंग करनी थी , संगीत में तबले के साथ हारमोनियम और संगीत के साथ नृत्य का संगत तो बहुत आम है लेकिन बांसुरी के साथ चित्रांकन का संगत नया प्रयोग था। पटियाला के फ़ाईन आर्ट्स विभाग ने ये प्रोग्राम स्पॉन्सर किया था। बड़े अहसान हैं इस भाई के मुझपर। केवल एक बार इसने मुझ पर गुस्सा किया था३० बरस पहले जब इसकी दी हुई इनकी प्रिय बांसुरी मैंने एक अमेरिकन लेखक फ्रेंड को गिफ्ट कर दिया था जो बांसुरी का बहुत शौकीन था। बाकि हमारे बिच कभी मतभेद नहीं हुआ , इनका प्यार सदैव मुझ पर बरसता रहा। आधुनिक भारत के महान बांसुरीवादक के रूप में इन्हे जाना जाता है गुरु शिष्य परंपरा के अंतर्गत कितने ही शिष्य इनकी देख रेख में संगीत की शिक्षा ले रहे हैं , उन्होंने कई फिल्मों के लिए अपना संगीत दिया है, जिनमें सनी देओल अभिनीत गदर और अनिल कपूर अभिनीत विरासत शामिल हैं। वह एस/एसएच जैसे प्रसिद्ध संगीत निर्देशकों के साथ जुड़े रहे हैं। इन्होने कल्याणजी आनंदजी, रवींद्र जैन, आदेश श्रीवास्तव, आनंद मिलिंद, उत्तम सिंह जी के साथ भी काफी काम किया है
देश विदेशों में आये दिन इनके कॉन्सर्ट आयोजित होते रहते हैं। इन्होने "धुन अकादेमी ऑफ़ म्यूजिक एंड कल्चर" की स्थापना की है जो कला के विकास में बहुत अच्छा काम कर रही है, बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी में नेशनल यूनिवर्सिटी एसोसिएशन द्वारा आयोजित कम्पटीशन और युथ फेस्टिवल में हम दोनों को अपने यूनिवर्सिटी के लिए गोल्ड मैडल मिला था,तब से हमारी दोस्ती और भी गहरी हुई है। काफी दिनों बाद आदित्य बिरला के एक प्रोग्राम में हमारी वापस मुलाकात हुई जंहा ये परफॉर्म कर रहे रहे थे और मैं उसका आर्ट डायरेक्टर था । हम दोनों गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए भी एक प्रयत्न करने वाले है। सूफियाना मिजाज के धनी इस महान कलाकार ने लगभग सभी धर्मों और वर्गों के लिएअपनी कला का प्रदर्शन किया है। सत्य साई संस्थान, अनादि सुर से लेकर इन्होने लगभग सभी धर्मों और वर्गों के लिए अपनी कला का प्रदर्शन किया है। भारतीय रागों के साथ प्रकृति को लेकर बिज़ ब्रांण्ड प्रोडक्शन ( नीदरलैंड्स ) इनके साथ काम करने को इच्छुक है। ईश्वर इन्हे सारी खुशियां दें, और हमारा प्यार यूँ ही बना रहे, आमीन.